बचपन से अंधा लड़का (Shrikanth Bolla) ने ऐसे खड़ी की करोड़ों की कंपनी!!

जिंदगी में बहुत कम लोग ऐसे होते है जो उनकी कमजोरी को ही अपनी ताकत बना पाते है. कई लोग तो अल्लाह या भगवान ने सब कुछ दिया होता है फिर भी वो हार मान लेते है और अपनी किस्मत को ही दोष देने लगते है. आज में एक ऐसे सफल व्यक्ति की प्रेरक कहानी (Short Motivational Story in hindi for Success) बताने वाली हूँ, जिसे ऊपरवाला ने महत्वपूर्ण अंग यानी आँख ही नहीं दी है, लेकिन उसने अपनी अक्षमता का रोना नहीं रोया, बहाना नहीं बताया, बल्कि कुछ ऐसा कर दिखाया की मानना भी मुश्किल हो जायेगा. चलिए जानते है ऐसे विरल व्यक्ति की वास्तविक जीवन कहानी (Real Life Story).

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Short Motivational Story in Hindi for Success

श्रीकांत बोला (Shrikanth Bolla) शायद आपने नाम सुना हो, पर यह व्यक्ति बचपन से ही अंधे है और वो अपनी आँखों से कुछ भी देख नहीं सकते है. इसके बावजूद भी आज उसने 80 करोड़ की एक सफल कंपनी स्थापित करके सफलता हांसिल की है. शारीरिक अक्षमता के कारण वह इंसान समाज को अनउपयोगी लगता है, समाज उससे भेद भाव भी रखता है, लेकिन उनकी जिंदजी भी खास होती है और मौका मिले तो वह खुद को साबित भी कर सकते है.

ठीक उसी तरह इस नेत्र हीन लड़का श्रीकांत बोला ने साबित कर दिखाया है. उसने भी बहुत कष्ट सहा है, उसने भी बहुत संघर्ष किया है तब जा कर सफलता मिली है. चलिए जानते है विगत से रसप्रद और प्रेरणा दायक कहानी की श्रीकांत ने अपने बिज़नेस में कैसे सफलता हांसिल की!

श्रीकांत बोल्ला (Srikanth Bolla) की जीवनी:

श्रीकांत बोला का जन्म 7 जुलाई 1992 सीतारामपुरम, मछलीपटनम नगर आंध्र प्रदेश शहर में हुआ. श्रीकांत बोल्ला के पिता का नाम दामोदर राव और उनकी माता का नाम वेक्टम्मा है. उनके परिवार की आर्थिक स्तिथि बहुत ही ख़राब थी. महिने भर में 1600 रूपए कमाने वाले परिवार में ऐसे दृस्टि हिन् बच्चे का जन्म शौक से कम नहीं था. घर वाले तो जैसे तैसे इस दुःख को बर्दास्त कर रहे थे. लेकिन रिश्तेदारों और पडोसी को बच्चे को जिंदा रहना बर्दास्त नहीं हो रहा था. सबने श्रीकांत के परिवार को सलाह दी की उसे मार दे और इस बच्चा दृस्टि हिन होने के कारण किसी काम का नहीं है. बड़ा होकर परिवार का बोज ही बनेगा.

श्रीकांत के घर वाले भले ही गरीब थे, लेकिन वो अपने बचे को हर हाल में बचाना चाहते थे. इसलिए उन्होंने किसी की भी बात नहीं सुनी. उसके परिवार ने फैसला किया की चाहे जैसा भी हो वो अपने बचे का पालन पोषण करेंगे. श्रीकांत के माता-पिता ने उसका पोषण एक आम इंसान की तरह किया और उन्हें किसी शारीरिक अक्षमता का अहसास नहीं होने दिया.

श्रीकांत बोल्ला (Srikanth Bolla) की शिक्षा:

श्रीकांत बड़ा होने के बाद उसका दाखला गांव के एक पाठशाला में करवाया. जिसके लिए वे 5 किलोमीटर दूर पैदल जाते. श्रीकांत नेत्रहीन होने के कारण क्लास की सबसे पिछली बैच पर बिठाया जाता था. सारे बचे उनका मजाक उड़ाते थे और कोई भी बच्चा उनसे दोस्ती करने के लिए तैयार नहीं था. इस सबसे परेशान हो कर वह हैदराबाद पहुंचे और वहां उनका दाखला करवा दीया.

इस स्कूल का माहौल गुलगुला था, क्योंकि वहाँ सारे बच्चे नेत्रहीन थे. जिसकी वजह से श्रीकांत के बहुत सारे दोस्त बन चुके थे और यहाँ उन्हें कोई तंग नहीं करता था. सबको आश्चर्य तब हुआ जब श्रीकांत नेत्रहीन होने के बावजूद भी वह थर्ड क्लास में अच्छे नंबर से पास होने लगे. 10 वी क्लास उन्हें 90% अंको के साथ पास की. जिसके बाद उन्हें तत्कालिक राष्ट्रीपति APJ Abdul Kalam के लीड इंडिया प्रोजेक्ट जोड़ने का मौका मिला.

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Short Motivational Story in Hindi for Success

श्रीकांत ने अन्याय की तरफ आवाज उठाई:

10 मी  के बाद श्रीकांत ने साइंस लेने की सोची. लेकिन स्कूल में साइंस में दाखला देने से मना कर दिया. उनका कहना था की साइंस नेत्रहीन जैसे बचो के लिए नहीं है. ऐसा बेवाजुद नियम छात्रों के खिलाफ एक अन्याय जैसा था. उन्होंने उसके खिलाफ आवाज उठाने की थामी और स्कूल पर केस कर दिया. उनकी पठाई की लड़ाई लगभग 6 महीने तक चली और आखिर कर उन्हें साइंस पढ़ने की इज्जाजत दे दी गई. 2 साल बाद उन्होंने स्कूल की सोच को आखिर में बदल ही दिया. जिसके मुताबिक उसने 12th 98% मार्क लाके सबको हैरान कर दिया.

श्रीकांत बोल्ला का करियर:

यहां से उनकी उड़ान को रोकने वाला कोई नहीं था. पठाई में अच्छे प्रदर्शन के कारण अमेरिका की Massachusetts Institite of Technology College में पढ़ने का मौका मिला. यह उनके लिए बहुत ही बड़ी उपलब्घि थी. क्युकी MIT (Massachusetts Institite of Technology College) में दाखला मिलने के बाद वह देश के पहले नेत्र हिन छात्र बन गए थे.

MIT (Massachusetts Institite of Technology College) की पढाई पूरी करने के बाद श्रीकांत को अमेरिका कई कॉर्पोरेट कंपनी में ऑफर मिली. लेकिन उन्होंने सभी ऑफरे ठुकरा दी. एक गरीब परिवार से आने वाले नेत्रहीन युवान के लिए विदेश की नौकरी से बढिया क्या हो सकता है. लेकिन श्रीकांत ने वो ऑफर ठुकरा दिए. उन्हें अपने देश के कमजोर लोगो के लिए कुछ करना था. अपनी इसी सोच के साथ वह भारत लौट आए. भारत में ही अपना काम करने की तैयारियां शुरू कर दी.

Bollant Industries की स्थापना:

2012 में इंडिया लौट के श्रीकांत ने Bollant Industries के नाम से एक कंस्यूमर फ़ूड पैकेज कंपनी की शुरुआत  की. जिसका मुख्य उदेश शिक्षित और दिव्यांग लोगों को रोगजार देना था, लेकिन उसके पास कंपनी खोलने के लिए फंड जमा नहीं हो रहा था. उस समय Ratan Tata उसके जस्बे और काम को देखते हुए उनकी कंपनी में 1.3 मिलियन इन्वेस्ट किया. जिसके बाद उसने नया हौसला मिला और आज की तारीख में वो Bolland Industries के आंधप्रदेश, तेलंगाना और कर्णाटक में अपनी 7 यूनिट स्थापित कर लिए है.

पत्तियों का इतेमाल करके इको फ्रेंक्ली पैकेज बनाने वाली कंपनी 2012 से 20% मासिक के दर से विकास कर रही है. आज उनकी कंपनी का टर्नओवर 200 करोड़ से ज्यादा है. सितंबर 2017 में उनकी कंपनी की वैल्यू 413 करोड़ हो गई थी. दृस्टि हिनता को कभी कमजोरी न मानने वाले श्रीकांत बोला आज अपने जैसे की सहायता के लिए जाने जाते है. आज उनकी कंपनी में लगभग 1500 लोग काम करते है और खास बात यह है की दिव्यांग लोगों भी उसमें काम करते है. श्रीकांत का मानना है की दिव्यांगता मन से होती है शरीर से नहीं.

श्रीकांत बोला की उपलब्धि और अवॉर्ड:

  • वर्ष 2016 में सीआईआई इमेजिंग इंटर प्रेन्थोर ऑफ 6 ईयर.
  • वर्ष 2016 में सीआईआई द्धारा इमेजिन इंटरप्रेन्योर ऑफ द ईयर का दावा.
  • वर्ष 2016 में यूथ बिजनेस इंटरनेशनल युगांडा धारी ग्लोबल के सामाजिक व्यवसाय.
  • वर्ष 2017 में फोर्ब्स के 30 अंडर में नामित किया.
  • वर्ष 2017 में साक्षी समूह दृारा इर्जिंग वारंट रिकॉर्ड करता है.
  • वर्ष 2018 में हिंदू बिजनेस लाइन ने यंग चेंजमेकर ऑफ द ईयर को देखा.
  • वर्ष 2019 में टीयू 9 मीडिया ग्रुप नव नक्षत्र सनमनम धाडरा.
  • वर्ष 2019 में भारत सरकार धारा राबंध उद्यमिता उद्देश्यकार.
  • वर्ष 2021 में विश्वव्यापी आर्थिक मंच से वैश्विक नेता चुने गए.

बेरोजगार लोगों के लिए:

श्रीकांत ने अपने आत्मविश्वास से इसका अंदाजा लगा लिया की उन्हें अपनी कोई चिंता नहीं. बल्कि वह भारत का भविष्य सुधारने की सोच रखते है. जिसके लिए उन्होंने सितंबर 2016 में SURGE IMPACT FOUNDATION की स्थापना की. जिसका उद्देश्य 2030 तक भारत में गरीबी, शिक्षा और बेरोजगारी को मिटा के एक साक्षात् राष्ट्र बनाना है. श्रीकांत ने अपने सफलता की कहानी अपनी महेनत और कभी भी हार न मानने वाले जस्बे के साथ लिखी है. श्रीकांत बोला आज लाखों लोगों के लिए प्राणास्त्रोत बन चुके है, जो शारीरिक कमी के कारण हार मान जाते है.

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श्रीकांत बोला की पत्नी का नाम क्या है?

श्रीकांत बोला की पत्नी का नाम वीरा स्वाति है.

श्रीकांत बोला की कंपनी का नाम क्या है?

श्रीकांत बोला की कंपनी का नाम Bollant Industries है.

श्रीकांत बोला कौन है?

श्रीकांत बोला एक नेत्रहीन बिजनेसमैन है.

Bollant इंडस्ट्रीज के फाउंडर का मालिक कौन है?

Bollant इंडस्ट्रीज के फाउंडर का मालिक श्रीकांत बोला है.

श्रीकांत बोला का जन्म किस साल में हुआ था?

श्रीकांत बोला का जन्म सन 7 जुलाई 1992 को हुआ था.

This Post Has 2 Comments

  1. Kartik

    Saach main sab ka mindset aisa hoona chahiye . Hats off to shrikant

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