Droupadi Murmu Depression से निकल राष्ट्रपति बनने तक की कहानी

द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) ने पहले अपने एक जवान बेटे की मौत अपनी आँखों के सामने देखी, फिर अपना दूसरा बेटा खो दिया। फिर उसी साल उनकी माताजी का अवसान हुआ। फिर अगले साल द्रौपदी मुर्मू के पति का भी अवसान हुआ और फिर उसी साल उनका भाई भी चल बसा। आप द्रौपदी जी की मानसिक स्थिति का अंदाजा लगा सकते हो की उन पर क्या बीत रही होगी, जब उनके सब चाहने वाले एक एक कर के उन्हें छोड़ कर जा रहे होंगे। पर कहते है ना कुछ लोग टूटकर बिखर जाते है, तो कुछ लोग टूटकर निखर जाते है। 

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Droupadi Murmu

द्रौपदी मुर्मू जी आज हमारे देश के सर्वोच्च और समानीय राष्ट्रपति पद पर विराजमान हो कर देश का करोभार संभाल रही है। वह भारत की आजादी के बाद जन्मी पहली महिला राष्ट्रपति है, इसी के साथ वह पहली आदिवासी राष्ट्रपति है। जी हां दोस्तों, आज हम बात करेंगे द्रौपदी मुर्मू के एक शिक्षक से राष्ट्रपति बनने तक के प्रेणादायक जीवन सफर (Droupadi Murumu Biography in Hindi) के बारे में।

द्रौपदी मुर्मू का जन्म:

द्रौपदी मुर्मू जी का जन्म 20 जून 1957 में ओडिशा के मयूरभंज जिले में एक आदिवासी परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम बिरंची नारायण टुडू था। जो पारंपरिक तौर से अपने गाँव और समाज के मुख्या थे।

बिरंची नारायण टुडू की तीन संतान थी, दो बेटे और एक बेटी। जिनके नाम भगत टुडू, सरणी टुडू और द्रौपदी टुडू। बिरंची नारायण पेशे से एक किसान थे और घर की आर्थिक हालत भी सामान्य थी। दोनों बेटो ने अपने घर में हाथ बटाने के लिए पढाई छोड़ दी थी। द्रौपदी को बचपन से ही पढ़ने लिखने में दिलचस्पी थी।

द्रौपदी मुर्मू की शिक्षा और संघर्ष:

द्रौपदी जी की शिक्षा में सबसे ज्यादा योगदान उनकी दादीजी का रहा है। जिन्होंने हर बार द्रौपदी को पढ़ने के लिए प्रेरित किया है। द्रौपदी जी की दादी थोड़ी बहुत इंग्लिश जानती थी और उन्हें शिक्षा का महत्व पता था। उन्होंने द्रौपदी को भी इंग्लिश सिखाई और हंमेशा आगे पढ़ने की लिए हौसला दिया।

द्रौपदी मुर्मू ने अपनी प्राथमिक शिक्षा अपने गाँव बैदोपोसी की स्कुल से पूरी की थी। माध्यमिक और ऊंच स्कुल गाँव में नहीं था। द्रौपदी पढ़ना चाहती थी पर वह मजबूर हो गई थी। पर एक दिन भगवान ने उनकी मानो सुन ली।

गाँव में एक बार सरकारी अधिकारी और मंत्रीजी का दौरा हुआ। द्रौपदी जी उनके पास गई और आगे पढ़ने की इच्छा जाहिर की। उनकी यह युक्ति या कहो प्रयास काम कर गया। सरकारी अधिकारी और मंत्री जी की मदद से उनका दाखिला उपरबेदा की एक हाईस्कूल में हो गया और उनके रहने की व्यवस्था भी करवा दी गई।

डिग्री और प्रथम नौकरी:

हाईस्कूल के बाद द्रौपदी जी ने सरकारी योजनाओं की मदद से रमादेवी वुमंस कॉलेज, भुनेश्वर में दाखिला लिया। जहाँ उन्होंने आर्ट्स यानि कला में स्नातक की डिग्री प्राप्त की।

स्नातक होने के बाद उनका एक ही मकसद था की वो कैसे अपने परिवार को काम आ पाए। उन्हें अपने परिवार की अब आर्थिक तौर से मदद करनी थी। इस के लिए द्रौपदी जी ने नौकरी ढूँढना शुरू कर दी।

कुछ प्रयासों और अच्छी शिक्षा के कारण उन्हें नौकरी मिल भी गई जो थी उड़ीसा के सिंचाई विभाग में कनिष्ठ सहायक की। यह नौकरी उनके लिए काफी सम्मान्य थी, और वह अब बेटो की तरह अपने पिता का सहारा भी बन रही थी।

विवाह और पारिवारिक जीवन:

स्नातक होने के बाद द्रौपदी जी का विवाह श्याम चरण मुर्मू (Droupadi Murmu Husband)  से हुआ। श्याम चरण मुर्मू एक बैंक के कर्मचारी थे। शादी के बाद एक पढ़ी लिखी लड़की के जीवन में जैसी दिक्ते आती है वैसी ही परेशानियाँ द्रौपदी जी के जीवन में आई। उनके परिवार वालों ने उन्हें नौकरी करने से मना कर दिया

जिसका कारण यह था की परिवार जनो को लगता था की अगर पति पत्नी दोनों नौकरी करेंगे तो बच्चों की परवरिश पर ध्यान नहीं दे पाएँगे। द्रौपदी ने सब की बात का मान रख नौकरी छोड़ दी और गृहणी बन गई। 

द्रौपदी मुर्मू और श्याम चरण मुर्मू (Droupadi Murmu Husband) की कुल 3 संतान हुई। दो बेटे और एक बेटी। बड़े बेटे का नाम लक्ष्मण मुर्मू (Droupadi Murmu Son) था। उनकी बेटी का नाम इतिश्री मुर्मू  (Droupadi Murmu daughter) है। द्रौपदी जी ने अपनी बेटी को भी हमेंशा पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया है और आत्मनिर्भर बनने की सलाह दी हैं।

इति ने आगे चल अच्छी शिक्षा ग्रहण की और उसी के दम पर इति को एक बैंक में नौकरी भी मिल गई। इति ने झारखंड के रहने वाले गणेश से विवाह किया है और आज एक सुखी जीवन बीता रही है।  आज इति की भी एक बेटी है जिसका नाम उन्हों आध्याश्री रखा है।

नौकरी छोड़ ने के बाद द्रौपदी मुर्मू जी ने गाँव में जाकर एक इंटीग्रल एजुकेशन सेंटर से जुडी और गाँव के गरीब बच्चों पढ़ना शुरू कर दिया। वह बिना किसी तन्खा और पैसो को लालच के बच्चों को पढ़ाती थी और आगे बढ़ कर कुछ करने की शिक्षा देती थी।

जीवन पर्वतों की श्रृंखला के सामान है। जिसमे उतार चढ़ाव आते ही रहते है। द्रौपदी जी के जीवन में भी कई उतार चढ़ाव आये पर वह किसी भी मुसीबत से हारी नहीं और डट कर हर परेशानी का सामना किया।

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Droupadi Murmu Biography in Hindi

पति, पुत्र, माँ और भाई की मृत्यु:

उनके जीवन में ऐसा भी वक्त आया जब वह पूरी तरह से डीप्रेशन का शिकार हो गई। इस डिप्रेशन के पीछे एक नहीं पर कई सारे कारण मौजूद थे। द्रौपदी जी एक बेटे की 25 साल की आयु में अकाल मृत्यु हो गई। वह यह सदमा सह न पाई और पूरी तरह से डिप्रेशन में चली गई। उनके चेहरे की हसी तो मानो कही खो सी ही गई। 

द्रौपदी जी यह बात जानती थी की डिप्रेशन उन्हें पूरी तरह खा जायेगा। इस से बहार निकल ने के लिए उन्होंने आध्यात्मिक मार्ग की और रुख किया। द्रौपदी जी इस तरह ब्रह्मकुमारी संस्था से जुडी और अपना ध्यान प्रभु भक्ति में लगाया।

द्रौपदी मुर्मू सदमे में से धीरे धीरे बाहर आती जा रही थी पर मानों कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। 2013 में उनके दूसरे बेटे की भी एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई। उनके जीवन में तो मानों काले बादल छा गए। उनके दुखो की कोई सिमा न रही, देखते ही देखते उन्होंने अपने दोनों बेटो को खो दिया। 

वह वापस डिप्रेशन में चली गई। कुछ ही दिनों के बाद, उसी महीने में उन्हें खबर मिली की उनकी माँ नहीं रही। द्रौपदी जी पर एक एक कर मानों मुसीबतो के पहाड़ टूट रहे थे। वह दिन-ब-दिन ओर ज्यादा दुखी होती जा रही थी।

यह उनके जीवन का सबसे खराब समय था। उन्होंने एक ही महीने में अपने 3 सबसे प्यारे लोगो को खो दिए थे। द्रौपदी मुर्मू अभी कुछ सम्भली ही थी की फिर से एक बार कुदरत ने उनके साथ छल कर दिया। 2014 में उनके पति श्याम चरण मुर्मू (Droupadi Murmu Husband) का भी देहांत हो गया।

मुसीबत रुकने का नाम नहीं ले रही थी। पति के अवसान के कुछ ही समय बाद द्रौपदी जी के भाई का भी देहांत हो गया। ऐसा लग रहा था की कुछ बड़ा देने के लिए पहले कुदरत मुसीबत देकर द्रौपदी मुर्मू को अच्छी तरह परख रहा था। 

पति और पुत्रो के निधन के बाद घर में बस दो ही माँ बेटी रह गई। द्रौपदी मुर्मू के लिए अब सामान्य जीवन में आना मुश्किल हो गया पर उन्होंने हार नहीं मानी और अपना ध्यान जनकल्याण के कामो में पिरोया।

द्रौपदी मुर्मू ने बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देना, विद्यालयों में जा कर पढ़ाना और आदिवासी समुदाय की शिक्षा क्षेत्र में बहुत ही सहायता की है। कुछ समय उपरांत वह NGO में जुडी और उनके साथ मिलकर कई अलग अलग अविकसित गाँवो में जा कर शिक्षण के प्रति जागृति लाना, समाज विकास और व्यसन-मुक्ति जैसे कई जनकल्याण के कामो में अहम् किरदार निभाया।

द्रौपदी मुर्मू ने किए लोग कल्याण के कार्यो और आदिवासी समाज में उनके रुतबे को देखकर राजनैतिक दल उन्हें अपने साथ जुड़ने का आमंत्रण दिया। राजनीती में जा कर समाज और अपने लोगों की ओर अच्छी तरह से सेवा कर पायेगी। यह सोच कर द्रौपदी जी ने राजनीती में क़दम रखा।

राजनीतिक जीवन:

द्रौपदी जी ने सन 1997 में ही राजनीति में कदम रख दिया। बीजेपी के साथ जुड़कर वह प्रथम बार रायरंगपुर नगर पंचायत में एक पार्षद का चुनाव लड़ी और उसमे जीत भी हासिल की।

सन 2000 में द्रौपदी मुर्मू जी को ओडिशा सरकार में स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री के रूप में नियुक्त किया गया। उसी के साथ वह ओडिशा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और बीजू जनता दाल (BJD) के गठबंधन में शामिल हुई।

उसके बाद द्रौपदी जी ने सन 2000 से सन 2004 यानि तक़रीबन 4 साल तक मत्स्य पालन व परिवहन विभाग और दूसरे महत्वपूर्ण विभागों में कार्य कर ओडिशा के विकास में एक अहम योगदान दिया। 

सन 2009 में बिना किसी गठबंधन के द्रौपदी जी विधायक बनी। इसी के साथ द्रौपदी मुर्मू के पास ओडिशा सरकार में परिवहन, वाणिज्य, मत्स्य पालन और पशुपालन जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों को संभालने का अनुभव भी था।

2013 में उन्हें बीजेपी कार्यकारिणी के सदस्य के रूप बीजेपी में निमित किया गया।

साल 2007 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ विधायक नीलकंठ पुरस्कार से भी नवाजा गया।

द्रौपदी मुर्मू झारखंड की पहली आदिवासी राज्यपाल बनने वाली महिला भी रह चुकी है। 18 मई 2015 में द्रौपदी जी को झारखंड के राज्यपाल के रूप में नियुक्ति किया गया। वह इस पदवी पर 6 साल 1 महीना और 18 दिन तक विराजमान रही।

इसी बीच हमे उनका कठोर और उग्र रूप भी देखने को मिला  जब उन्होंने मई 2017 में सीएनटी-एसपीटी एक्ट संशोधन विधेयक को बगैर दस्तखत किए सरकार को वापस लोटा दिया। उनका मानना था की यह एक्ट आदिवासी के हित में नहीं है।

कैसे बनी राष्ट्रपति?

भारतीय जनता पार्टी द्वारा द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति के पद के लिए उमेदवार बनाया गया। इस के पीछे उनका यह सोचना था, की द्रौपदी जी ने अपनी पूरी जिंदगी गरीबी में और गरीबो की सेवा में व्यतीत की है। उनके पास एक अच्छा तजुर्बा है। साथ ही साथ उनके पास सही समय पर सही निर्णय लेने की समज भी है और उनकी उदारवृति उनके अच्छे किरदार की छबी बताती है।

कुल मिलाकर उनके पास एक उत्तम योग्यता थी राष्ट्रपति बनने के लिए। सभा का निर्णय भी उनकी ओर हुआ और जैसा की हम सब जानते है 25 जुलाई 2022 को वह भारत की दूसरी महिला राष्ट्रपति, भारत की सबसे कम उम्र की राष्ट्रपति और पहली आदिवासी राष्ट्रपति बनी। 

तो दोस्तों यह थी एक छोटे से गाँव की निकली महिला द्रोपदी, जिसने कई मुसीबतों का सामना कर देश के सर्वोच्च पद पर बैठने तक की कहानी। आशा है की आपको इस से प्रेणना मिलेंगी।

आपने यह Droupadi Murmu की रियल लाइफ स्टोरी (Real Life Story) दिलचस्पी से पढ़ी इसका मतलब है की आपको ऐसी इंस्पिरेशनल रियल लाइफ स्टोरी (Inspirational Real Life Story) पढ़नी बहुत अच्छी लगती है। ऐसी ही हमारी ओर पुरानी वास्तविक प्रेरणादायक कहानी भी आपको पसंद आएगी, जैसे की IAS Savita Pradhan की दिल दहलादेने वाली सफलता की कहानी और 15 साल की उम्र में एसिड अटैक का शिकार बनी लक्ष्मी अग्रवाल की संघर्ष गाथा।

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Who is Droupadi Murmu?

Droupadi Murmu is 15th Indian President.

What is Droupadi Murmu’s Qualification?

Droupadi Murmu qualification is Bachelor of Arts Graduate.

What is Droupadi Murmu’s daughter name?

Droupadi Murmu’s daughter name is Iti Murmu.

What is Droupadi Murmu’s cast?

Droupadi Murmu cast is ST – Scheduled Casts.

What is name of Draupadis Murmu’s tribe?

Droupadi Murmu’s tribe name is Santali.

What is Droupadi Murmu’s religion?

Droupadi Murmu religion is Hinduism.

What is Droupadi Murmu’s Salary?

Droupadi Murmu’s Salary is 6 million rupees per year.

How year old Droupadi Murmu is?

Droupadi Murmu age is 65 year(2023).

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