Karsanbhai Patel ने ऐसे संघर्ष करके बनाई No.1 निरमा ब्रांड!

दोस्तों, आज हम बात करने वाले है करसनभाई पटेल (Karsanbhai Patel) की। शायद आप लोगों ने उनका नाम शायद नहीं सुना हो पर, “दूध सी सफेदी निरमा से आए, रंगीन कपड़ा भी खिल खिल जाए”। यह गाना सुनते ही अपने मन में सीधा वॉशिंग पाउडर निरमा का ख्याल आता है, है ना?

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Karshanbhai Patel

जी हां मित्रो, सामान्य परिवार की गृहिणी को लक्ष्य में रख कर बनाया गया वाशिंग पाउडर आज सामान्य के साथ धनवान लोगों की पसंद की ब्रांड बन चूका निरमा हर घर में छा गया है।आज हम निरमा के मालिक करसन भाई पटेल (Karsanbhai Patel Nirma Owner) के बारे में दिलचस्प बातें जानेंगे जिसने साइकिल से शुरू किया कारोबार पूरी दुनिया में फैला दिया है। निरमा के संस्थापक करसन भाई पटेल ने यह करिश्मा कैसे करके दिखाया चलो जानते है विगत से।

Karsanbhai Patel जन्म एवं अध्यापन:

करसन भाई पटेल का जन्म 13 अप्रैल 1945 उत्तरी गुजरात के रूपपुर गांव में एक साधारण से परिवार में हुआ था। उनके पिताजी किसान थे। करसनभाई की प्रारंभिक शिक्षा मेहसाना शहर की छोटी सी स्थानीय सरकारी स्कूल में हुई, उसके बाद उन्होंने आगे बीएससी की पढ़ाई की

परिवार की साधारण स्थिति देखकर करसन भाई पहले कॉटन मिल्स में काम पर लग गए और फिर वहां से गुजरात सरकार के खनन और भूविज्ञान में काम में जुट गए। वह सरकारी नौकरी तो कर रहे थे, लेकिन मन ही मन कुछ बिजनेस के लिए भी विचार कर रहे थे। साधारण स्थिति एवं घर की जिम्मेवारी के कारण नौकरी तो ना छोड़ सके, लेकिन उन्होंने नौकरी के साथ-साथ बिजनेस करने का सोचा।

कैसे हुई बिजनेस की शुरुआत:

करसन भाई पटेल (Karsanbhai Patel) अपने घर के पिछवाड़े में ही डिटर्जेंट पाउडर बनाना शुरू किया और डिटर्जेंट बनाने में सफलता के बाद उसने उसका नाम अपनी बेटी के नाम से “निरमा डिटर्जेंट” रखा। निरमा डिटर्जेंट बन तो गया, लेकिन नौकरी करते करते उसे बेचने का समय कब रहता?

दूसरी ओर बिजनेस के शुरुआती तौर पर उन्होंने सेल्समेन रखना सही नहीं समझा। उन्होंने अपने इलाके में अपनी साइकिल पर ही नौकरी से छूटने के बाद और सुबह नौकरी पर जाने से पहले यह डिटर्जेंट बेचने का काम शुरू किया। नौकरी से शाम को घर आ कर वह डिटर्जेंट बनाते थे और दूसरे दिन सुबह दफ्तर जाने से पहले वे घर से जल्दी निकल जाते थे। साइकिल पे 15 से 20 थैली पाउडर अपने साथ ले जाते थे।

फिर अपने इलाके में अपने आसपास के इलाके में जाकर घर घर पहुंचकर  पाउडर का मार्केटिंग करते थे और दूसरी कंपनियों के मुकाबले उन्होंने अपना डिटर्जेंट पाउडर काफी हद तक सस्ता भी बेचा। शुरुआती दिनों में केवल ₹3 प्रति किलो वह निरमा डिटर्जेंट बेचते थे। वह खुद ही घर पर बनाकर रोज का 15 से 20 पैकेट पाउडर बेचते थे। धीरे-धीरे लोगों को सस्ता और सबसे अच्छा पाउडर जांच गया, और देखते ही देखते निरमा पाउडर सफल हो गया।

निरमा पाउडर की सक्सेस के पीछे करसन भाई की अपनी खुद की बिजनेस तकनीकी काम कर गई। एक तो यह कि वह खुद घर घर जाकर अपना डिटर्जेंट बेचते थे और उसे खुद अपनी प्रोडक्ट पर बहुत भरोसा था। इसीलिए तो अब वह निरमा के हर पैकेट पर कपड़ा साफ ना होने पर पैसे वापस रिटर्न करने की गारंटी देने लगेI इसका फायदा यह हुआ कि लोगों में इनके पाउडर के प्रति भरोसा दिन-ब-दिन बढ़ता गया और फिर लोग इसे आसानी से खरीदने लगे।

चलो अब जानते हैं कि कैसे उन्होंने चंद रुपयों से डिटर्जेंट बनाने का काम शुरू करके कैसे निरमा डिटर्जेंट को एक ब्रांड के रूप में बाजार में स्थापित किया।

Karsanbhai Patel अपने ब्रांड का नाम निरमा क्यों रखा?:

सामान्य तौर पर हम जैसे लोग अपने निकट के प्रियजनों के खोने पर दुखी हो जाते हैं और यहां तक की खुद के जीवन की आशा भी खो बैठते है। करसनभाई पटेल के जीवन में एक पल ऐसा भी आया जब उन्होंने कार दुर्घटना में अपने बेटी को खो दिया। इसके बाद उसका जीवन लगभग बदल गया। लेकिन उसने इस बात पर खुद को नासीपास ना करते हुए, अपनी बेटी को जीवन में वापस लाने का एक नया ही तरीका खोजा।

उनकी बेटी का नाम निरुपमा था, बहुत कम लोग जानते हैं कि निरमा इसी का संक्षिप्त नाम है। नीरमा के पैकेट पर दिखने वाली लड़की की छवि भी उसकी बेटी की याद में बनाई गई थी। इसी वजह से करसन भाई पटेल ने निरमा समूह को अपने बेटे की तरह पाला।

Karsanbhai Patel ने कैसे बनाया ब्रांड?:

लगातार तीन साल तक साइकिल पर पाउडर बेचने के बाद करसन भाई ने इस में ही अपना भविष्य उज्जवल देखा और करसन भाई ने बिना हिचकिचाहट अपनी सरकारी नौकरी छोड़ दी। उन्होंने अहमदाबाद के पास एक छोटी फैक्ट्री लगा ली।

सबसे अच्छी गुणवत्ता और सबसे कम कीमत की वजह से निरमा डिटर्जेंट पाउडर हर घर में पसंदीदा पाउडर बन गया। इसके बाद व्यापार का और विस्तार करने के लिए अपनी सूझबूझ से करसन भाई ने रेडियो और टेलीविजन के माध्यम से निरमा डिटर्जेंट को भारत की हर गृहिणी के मन में बिठा दिया।

आपको भी अब याद आ ही गया होगा, “दूध सी सफेदी निरमा से आए, रंगीन कपड़ा भी खिल-खिल जाए; सबकी पसंद निरमा, वॉशिंग पाउडर निरमा।”

देखते ही देखते निरमा ब्रांड गुजरात और महाराष्ट्र में ब्रांड के रूप में स्थापित हो गया। उस समय डिटर्जेंट और साबुन के बाजार पर बहुराष्ट्रीय कंपनियां जैसे कि हिंदुस्तान लीवर वगैरे का प्रभुत्व और दबदबा बना रहता था। जो सर्फ पाउडर ₹13 प्रति किलो के भाव पर बेचते थे।

करसन भाई ने तब अपनी दूरदर्शिता से केवल 10 साल के अंदर निरमा को भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाला डिटर्जेंट पाउडर बना दिया।

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Karsanbhai Patel Nirma

कैसे दीया हजारों लोगों को रोजगार?:

सन 2004 तक निरमा में लगभग 14000 लोग काम कर रहे थे। 2004 के आंकड़ों के अनुसार निरमा कंपनी का टर्नओवर 50 करोड़ डॉलर से भी ज्यादा है जो अब 100 करोड़ डॉलर हो गया है। फोर्ब्स के अनुसार 1 साल मे 8 लाख टन निरमा डिटर्जेंट बिकता है।

ज्यादा से ज्यादा और रोजगार बढ़ाने के लिए और ग्राहक की जरूरत को ध्यान में रखते हुए कंपनी के अब नए प्रोडक्ट की शोध करना भी जरूरी था। पहले मध्यम वर्ग की दुविधा को ध्यान में रखते हुए करसनभाई ने ₹3 पर किलो वाला डिटर्जेंट तैयार किया और अब ऊपरी वर्ग के लोगों की मांग के मुताबिक थोड़ा सा ज्यादा अच्छा और थोड़ा ज्यादा महंगा प्रीमियम पाउडर तैयार किया और उसे “सुपर निरमा डिटर्जेंट” नाम दिया। 

उसके बाद तो निरमा ने लगातार नई नई शोध जारी रखी और “निरमा बाथ”  “निरमा ब्यूटी सॉप” “निरमा शैंपू” और टूथपेस्ट में भी अपने पांव पसारे। उसमें बिल्कुल ठीक ठीक सफलता मिली।

उसके बाद निरमा  “शुद्ध निरमा” नामक खाने का नमक भी बाजार में लाया। उसमें निरमा को काफी हद तक सफलता मिली।

आप शायद सोच भी नहीं सकते की डिटर्जेंट पाउडर के क्षेत्रों में लगभग 35% बाजार आज भी निरमा के कब्जे में है। ऐसा मान लीजिए कि निरमा की सुगंध लोगों के कपड़े पर ही नहीं बल्कि लोगों के दिलों दिमाग में छा गई। आखिरकार करसनभाई की दिन-रात की मेहनत रंग ला गई।

निरमा डिटर्जेंट की सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि यह सबसे कम दामों में सबसे अच्छी गुणवत्ता प्रदान करता था। तभी तो इतने बड़े-बड़े प्रतिस्पर्धी यों के होते हुए भी निरमा में अपना अड्डा बाजार पर जमा लिया। आज भी निरमा में लगभग 400 वितरक और अबे लाख से अधिक खुदरा दुकानें शामिल है।

तभी तो निरमा भारत के छोटे से छोटे गांव में भी उपलब्ध हो सकता है। निरमा का यह विशाल नेटवर्क वास्तविक रूप में प्रशंसनीय है।

अपने देश के बाजार को बहुत अच्छी तरीके से गौर करने के बाद करसन भाई पटेल ने अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी अपने कदम बढ़ाए। और बांग्लादेश में एक संयुक्त साहस स्थापित किया। तत्पश्चात निरमा के कदम चीन आफ्रीका  और बाकी कई देशों की तरफ से आगे बढ़े।

निरमा कंपनी का भारत में योगदान:

अब करसनभाई (Karsanbhai Patel) अपने पाउडर के माध्यम से लोगों की और अपनी कंपनी के माध्यम से रोजगार सर्जन करने के अलावा देश में ज्यादा से ज्यादा ओर भी योगदान कैसे दिया जाए उसके विषय में सोचने लगे। बहुत-बहुत विचारों के बाद उन्होंने योगदान के लिए शिक्षा क्षेत्र को चुना।

सन 1995 में करसन भाई पटेल (Karsanbhai Patel) ने अहमदाबाद में  “निरमा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी” की स्थापना की और बाद में एक प्रबंधन संस्था की भी स्थापना की। थोड़े समय के अंतराल में ही यह दोनों संस्था “निरमा यूनिवर्सिटी” के अंतर्गत लाई गई। सन 2004 में करसनभाई पटेल द्वारा निरमा लैब्स की भी स्थापना की गई।

पुरस्कार और सम्मान:

हम सब ने जाना कि निरमा की इतनी विशाल सफलता के पीछे केवल करसनभाई की लगातार मेहनत, दूरदर्शिता और संघर्ष है। हमने यह भी जाना कि कैसे उन्होंने अपने नफा का मार्जिन कम रखा और लोगों की जरूरतों को ज्यादा समझा। अपने व्यापार के अनूठे फंडे से कैसे वह पूरे देश में और बाद में अंतरराष्ट्रीय लेवल पर भी जा पहुंचे।

करसन भाई पटेल (Karsanbhai Patel) की सोच एवं संघर्ष की गाथा वास्तव में प्रशंसनीय है। तभी तो देश की अर्थव्यवस्था और उद्योग में उनके योगदान के लिए उन्हें समय-समय पर विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

दो बार साबुन और डिटर्जेंट के विकास परिषद के अध्यक्ष बने है।

नई दिल्ली के लघु इंडस्ट्रीज द्वारा उद्योग रत्न की उपाधि से नवाजे गए है।

गुजरात डिटर्जेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बनाए गए है।

सन 1990 में उत्कृष्ट उद्योगपति के सम्मान से नवाजे गए है।

सन 1998 में गुजरात व्यवसाय पुरस्कार से सम्मानित किए गए है।

रोटरी इंटरनेशनल द्वारा कॉरपोरेट गवर्नेंस में उत्कृष्टता पुरस्कार दिया गया है।

करसन भाई पटेल (Karsanbhai Patel) को वर्ष 2001 में फ्लोरिडा अटलांटिक विश्वविद्यालय फ्लोरिडा संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया है।

अपने घर के पिछवाड़े में वाशिंग पाउडर की स्थापना करने वाले करसनभाई पटेल अब दुनिया और भारत की अरबपतियों की सूची में है। अब करसन भाई पटेल ने कारोबार अपने दोनों बेटों राकेश पटेल और हीरेन भाई पटेल को सौंप दिया है। कई पुरस्कार जीत चुके करसनभाई को 2010 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

दिल से, करसन भाई पटेल केवल गुजरात के लिए ही नहीं बल्कि पूरे भारत के लिए एक उदाहरण रूप व्यापारी है। करसन भाई पटेल की संघर्ष गाथा हमें भी आगे बढ़ने के लिए और संघर्ष करने के लिए अनोखी प्रेरणा देती है। वो कहते हैं ना,

“किया हुआ संघर्ष कभी व्यर्थ नहीं जाता,

मेहनत को निराशा का शब्द नहीं भाता;

यदि ठान ले इंसान दिल से कुछ करने की,

तो सोचिए जिंदगी में क्या-क्या नहीं पाता!”

आपने यह Nirma Karsanbhai Patel की रियल लाइफ स्टोरी (Real Life Story) दिलचस्पी से पढ़ी इसका मतलब है की आपको ऐसी इंस्पिरेशनल रियल लाइफ स्टोरी (Inspirational Real Life Story) पढ़नी बहुत अच्छी लगती है। ऐसी ही हमारी ओर पुरानी वास्तविक प्रेरणादायक कहानी भी आपको पसंद आएगी, जैसे की सिर्फ अठरा महीने में वंदे भारत एक्स्प्रेस बनाने वाले सुधांशु मनी की जीवन कहानी और बचपन से अँधा लड़का Shrikanth Bolla ने ऐसे खड़ी की करोड़ो की कंपनी।

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Who is Karsanbhai Patel?

Karsanbhai Patel is Indian businessman. Who own Nirma Group.

What is Karsanbhai Patel’s net worth?

Karsanbhai Patel’s net worth is 290 crores USD.

What is Karsanbhai Patel’s daughter name?

Karsanbhai Patel’s daughter name is late Nirupama Patel.

Who is Karsanbhai Patel’s son?

Rakesh, Hiren and Kalpesh Patel are Karsanbhai Patel’s son.

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