सिर्फ 2 रुपए कमाने वाली Kalpana Saroj आज है 700 करोड़ की मालकिन!

अक्सर लोग लड़कियों के बारे में बोलते है की लड़कियाँ पराया धन होती है. उन्हें ज्यादा पढ़ना-लिखना नहीं चाहिए. ऐसी ही सोच वाले परिवार में पली एक लड़की की कहानी आपकी आँखों में आंसू ला देगी. जो रोज के सिर्फ २ रूपये कमेटी थी और एक बार आत्महत्या का भी प्रयास कर चुकी थी और आज करोड़ो कमा रही है. यह प्रेरणादायक वास्तविक कहानी है कल्पना सरोज की. कल्पना सरोज (Kalpana Saroj) की इस कहानी को सुनकर हमें भी अपनी लड़कियों को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरणा मिलेगी.

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Kalpana Saroj

कल्पना सरोज ने सिर्फ 2 रूपए से अपनी गरीबी को मिटाया. मुंबई में आज वही कल्पना के नाम से दो रोड है और बड़ी कंपनिया है. चलो जानते है की आखिर कल्पना सरोज है कौन और कैसे बनी करोड़पति?

Who is Kalpana Saroj?

सपनों की नगरी यानि की मुंबई शहर. कल्पना सरोज मुंबई में आई तो उनके पास रहने को घर नहीं था. वह गुजराती के परिवार में रही है. उसने सिर्फ 2 रुपये से अपनी गरीबी मिटाई और आज वह मुंबई शहर की बिल्डर है. उसने 2 रूपए से काम स्टार्ट किया था. आज वह कल्पना सरोज 700 करोड़ कंपनी की मालिक है.

Kalpana Saroj Birth and Family:

कल्पना सरोज का जन्म महाराष्ट्र के अकोला जिले के छोटे से गाँव में हुआ था. वह दलित परिवार में जन्मी थी. उनके पिता जी एक हवालदार थे. कल्पना के पिता का पगार महीने में 300 रूपए ही था. वह 3 बहन, 2 भाई और चाचा-चाची, दादा-दादी के साथ रहते थे. कल्पना सरोज का परिवार बहुत ही गरीब था. इसलिए वह चाचा के साथ पोलिस क्वार्टर में ही रहते थे. उनकी आर्थिक स्तिथि बहुत ही कमजोर थी और कमाने वाला कोई नहीं था.

Kalpana Saroj  Education:

कल्पना सरोज ने पढ़ाई नहीं की है. उनको बचपन से ही एजुकेशन नहीं मिला. उनके मामाजी नहीं चाहते थे की वह आगे पढ़े और लड़कियों को ससुराल जाकर रसोई करना है और लोगों का तो बस कहना है की लड़कियाँ तो जेर की पुड़िया होती है. इसलिए उनकी बचपन में ही शादी कर दी गई थी.

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Kalpana Saroj

Story of Kalpana Saroj:

कल्पना जब 12 साल की थी तब ही शादी कर दी गई थी. जहां उनकी शादी हुई वह लोग पैसे वाले थे. परंतु कल्पना को बहुत ही तंग करते थे. उनके ससुराल वाले कल्पना को मारा करते थे. अगर गलती से शाक में नमक ज्यादा हो जाये तो उनको कई सारि बाते सुनाया करते थे और उनके माता-पिता को गाली भी दिया करते थे. कल्पना को सारे लोगों का दर्द सहन करना पड़ता था. रात को वह कोने में जाकर रोया करती थी. लेकिन मदद करने वाला कोई नहीं था.

एक दिन अचानक कल्पना के पिताजी उनको मिलने के लिए आए. कल्पना ने अपनी सारि बात बताई और उनके पिता जी को सारि बात का पता चला तो वह रोने लगे. उनके पिताजी को कल्पना का दर्द सहन नहीं हुआ और कल्पना को अपने ससुराल से ले गए. पैसे वाला ससुराल किस काम का जहाँ लड़कियों की इज्जत ना हो. लोगों का तो बस कहना है की लड़कियाँ तो जेर की पुड़िया होती है.

कल्पना सरोज को बचपन से ही पढ़ना अच्छा लगता था. वह पढ़-लिखकर कुछ बनना चाहती थी, लेकिन घरकी हालत देखकर उनकी शादी कर दी गई. कल्पना सरोज जब मुंबई आयी तो रहने को घर भी नहीं था और पैसे भी नहीं था. वह एक गुजराती परिवार के साथ रहती थी. बहुत ही पढ़ना चाहती थी, लेकिन किसी ने भी उनकी मदद नहीं की.

People’s Thinking:

कल्पना को ससुराल से वापस लाई गई तब उनके पिता ने पढाई के लिए स्कूल में दाखला करवाया. अक्सर लोग ताने मारते थे. कहते थे की देखो एक लड़कीने पढाई के लिए अपना ससुराल छोड़ दिया. उनके पिता जब कल्पना की मदद करते थे तब लोग बोलते थे के उनके पिताजी सही इंसान नहीं है. अपनी बेटी का घर खुद ही तोड़ दिया. कल्पना जहाँ रहती थी वहां के लोग उनको गाली भी देते थे.

कहते थे की लड़कियाँ जब ससुराल जाती है तो डोली में बैठकर जाती है और फिर उनकी अर्थी ही वापस आती है. ऐसे लोग उनको ताने मारते थे. कल्पना को ससुराल में भी ताने मारे करते थे और उनसे ज्यादा माता-पिता के घर के पास रहने वाले लोग ताना मारा करते थे. वह एक बोज बन गई थी. अब में जाऊ तो कहा जाऊ?

Kalpana Ne Suicide Ki Koshish Ki:

कल्पना सरोज लोगों के और ससुराल के ताने सुनकर तंग आ गई थी. उनके पास कोई भी रास्ता नहीं था. तब उन्होंने एक दुकान पे जाकर ज़हर की बोतल खरीदीं और ज़हर की बोतल को लेकर अपने बुआ के घर चली गई. फिर उस समय उन्होंने ज़हर पि लिया. जब उनकी बुआ रूम में पहुंची तो उनके हाथ में ज़हर की बोतल थी और मुँह से जाक निकल रही थी. सारे लोग एकठे हो गए और उनको हॉस्पिटल ले गए.

हॉस्पिटल ले जाने के बाद डॉक्टर ने कहा की कल्पना बच नहीं सकती. लेकिन 24 घंटे में होश आ गया तो ठीक है, अगर नहीं आया तो उनकी मौत हो सकती है. फिर कल्पना को 24 घंटे के अंदर ही होश आया और कल्पना सरोज बच गई. कल्पना के कई सारे लोग उनको हॉस्पिटल में मिलने के लिए आये. फिर कल्पना सरोज ने उसी वक्त थान किया की अब में मर के नहीं परन्तु जिंदा रहकर कुछ ऐसा काम करू की मेरा और माता-पिता का नाम रोशन करू.

Kalpana Saroj Struggle:

कल्पना सरोज ने अपनी पुरानी बातें सब दिमाग से मिटा दी. वह एक हवालदार की बेटी थी तब वह पोलिस स्टेशन गई काम के लिए, लेकिन अफसोश की बात है की उनकी कम उम्र और कम शिक्षा होने के कारण उसको काम के लिए मना कर दिया गया. कल्पना ने नर्सिंग, आर्मी और कई सारि जगह पर गई लेकिन कुछ भी काम नहीं मिल रहा था. अब कल्पना जाए तो कहाँ जाए?

कल्पना ने अपने माता-पिता और परिवार से मुंबई जाने की बात की. उनको लगता था की जहाँ उनको नौकरी मिल सकती है. फिर कल्पना सपनो की नगरी मुंबई में पहुंच गई. वह मुंबई में एक कंपनी में काम करने लगी. वहां उनको 2 रूपए रोज दिए जाते थे. पुरे महीमे सिर्फ 60 रूपये मिलते थे.

कल्पना सरोज के पिता की नौकरी किसी कारन से चली गई और अचानक उनकी बहन बहुत ही बीमार हो गई. उनके परिवार वाले इलाज करवाने के लिए कल्पना के पास मुंबई आ गए, लेकिन इलाज के पैसे न होने के कारण उनकी बहन का योग्य इलाज हो नहीं पाया और उनकी मृत्यु हो गई.

कल्पना के दिमाग में विचारो का तूफ़ान उमड़ रहा था और उनको अहसास हुआ की पैसे ही सबकुछ है. उनको पता चला की बिज़नेस के लिए सरकार की कुछ स्किम चल रही है. उस स्किम के के तहत खुदका बिज़नेस चालू करने के लिए उन्होंने सरकारी लोन ली. लोन लेने के बाद उसने अपना बुटीक का बिज़नेस स्टार्ट किया. उसको लगा की गोवेर्मेंट सबको नौकरी नहीं देती है, लेकिन बुटीक का बिज़नेस सब बेरोजगार कर सकते है. कल्पना ने अपनी संगठन बनाई और सारे लोगो को नौकरी दिलाई.

इस तरह कल्पना धीरे धीरे आगे बढ़ती गई और अपना नाम रोशन कर दिया. फिर वह बड़ी बिल्डर बन गई. लेकिन उसके रास्ते में अचानक ऐसा मोड़ आया की उनको मारने की धमकी दी गई. कल्पना पोलिस स्टेशन जाकर सब कुछ बताया और सारे पुलिस वाले उनका ध्यान रखने लगे और एक दिन धमकी देने वाले उन लोग को पकड़ा. कल्पनाने 2002 से 2006 तक लगातार महेनत की और कोर्ट ने उसे बिल्डर का लाइसेन्स दे दिया. जो व्यक्ति कंस्ट्रक्शन कंपनी में एक सामान्य वर्कर थी और रोज के सिर्फ २ रूपये मिलते थे. आज वही कल्पना सरोज 700 करोड़ की कंपनी की मालिक बन गई है.

आज मुंबई में कल्पना के नाम से दो रोड है: रामजीभाई कमानी और पुरना कमानी. जो लड़की ने सिर्फ 2 रूपए रोज से काम किया, आज वह करोड़ पति बन गई है. जो लोग उसे ताने मारा करते थे वही लोग आज उसे सलामी करते है. अगर कल्पना की तरह मजबूत इरादा हो और कुछ करने की चाहत और जूनून हो तो कोई भी लड़की आगे बाद कर खुद पग भर हो सकती है.

Kalpana Saroj Company Name:

कल्पना सरोज की मुख्य चार कंपनी है:

  • कल्पना बिल्डर एंड डेवलपर्स
  • कमानी स्टील्स
  • कल्पना एसोसिएट्स
  • केएस क्रिएशंस

Kalpana Saroj Net Worth:

कल्पना सरोज अपने जीवन में संघर्ष करके आगे आई है. रोज के सिर्फ 2 रूपए कमाती थी, पर आज उनकी कुल संपत्ति 700 करोड़ है. इतना ही नहीं, बल्कि बहुत सारे पुरस्कार भी कल्पना ने हांसिल किए है.

आपने यह रियल लाइफ स्टोरी (Real Life Story) दिलचस्पी से पढ़ी इसका मतलब है की आपको ऐसी इंस्पिरेशनल रियल लाइफ स्टोरी (Inspirational Real Life Story) पढ़नी बहुत अच्छी लगती है। ऐसी ही पुरानी वास्तविक प्रेरणादायक कहानी भी आपको पसंद आएगी, जैसे की 15 साल की उम्र में एसिड अटैक का शिकार बनी लक्ष्मी अग्रवाल की संघर्ष गाथा. और MBA की डिग्री छोड़ प्रफ्फुल बिल्लोर चाय बेच कर ऐसे बना करोड़पति!

कल्पना सरोज की कितनी कंपनी है?

कल्पना सरोज की मुख्य चार कंपनी है.

कल्पना सरोज की पिता क्या काम करते थे?

कल्पना के पिता एक हवालदार थे.

कल्पना की शादी किस सालमे हो गई थी?

जब कल्पना 12 साल की थी तब उनकी शादी हो गई थी.

कल्पना सरोज कमाने के लिए कहाँ आई?

कल्पना सरोज कमाने के लिए सपनो की नगरी मुंबई में आई.

मुंबई में कल्पना के किस नाम के रोड है?

कल्पना सरोज के मुंबई में 2 रोड है: रामजीभाई कमानी और पुरना कमानी.

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