झाड़ू वाला से Top Fitness Coach बना Rakesh Udiyar की संघर्ष भरी कहानी

राकेश उदियर (Rakesh Udiyar) जो झाड़ू लगाने का काम करते थे और आज भारत का टॉप फिटनेस कोच (Top Fitness Coach) बन चुके है। सलमान खान, आमिर खान, अरबाज खान और ऐसी कई बड़ी बड़ी मशहूर हस्तियों की फिटनेस से आप भी प्रभावित जरूर हुए होंगे। पर क्या आपको पता है की इन हस्तियों की फिटनेस और आकर्षक बॉडी के पीछे जिस शख्स की मेहनत है वो है राकेश उडियार। सफलता अपने आप नहीं मिलती। उन्होंने जीवन में बहुत संघर्ष कर के सफलता हांसिल की है। चलिए जानते है जिम कोच (Gym Coach) के जीवन से जुडी कुछ अनसुनी और मजेदार बातें जो सभी को प्रेरणा दे सकती है।

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Top Fitness Coach Rakesh Udiyar

Top Fitness Coach Rakesh Udiyar Birth and Family:

टॉप फिटनेस कोच (Top Fitness Coach) बन चुके राकेश उदियर (Rakesh Udiyar) का जन्म 1984 में मुंबई में हुआ था। राकेश के घर की स्थिति बचपन से ही अच्छी नहीं थी। गरीबी के सापने उनके जीवन पर फंदा कश लिया था। राकेश के परिवार में कुल 5 लोग थे। राकेश उनके माता पिता और भाई महेश और बहन सोनाली।

राकेश के पिता पैरालाइज हो गए थे और घर की सारी जिम्मेदारियाँ माँ पर आ गई थी। राकेश और उनके भाई बहन अभी छोटे थे। राकेश जब पांच-छ साल के थे तबसे ही उन्होंने कुछ काम करके माँ की मदद करने का सोच लिया था, पर पांच साल के बच्चे को आखिर कौन काम पर रख सकता है? राकेश की माँ बिचारी पुरे दिन किसी के घर में झाड़ू, पोछा और बर्तन कर के अपने पति और बच्चो का पेट पाल रही थी। राकेश के पिता भी कुछ करना चाहते थे, पर क्या करे? कुदरत ने जो उनकी स्थिति बनाई है उसके आगे वह मजबूर थे।

राकेश को पैसे न दिए और किया अपमान:

फिटनेस कोच (Fitness Coach) राकेश उदियर (Rakesh Udiyar) के जीवन से जुड़ा एक प्रसंग है। जब राकेश छोटे थे, तो उनके घर में ऐसा अकाल पड़ा की एक भी रूपया नहीं था। राकेश की माँ ने राकेश को अपने एक रिश्तेदार के घर पांच रुपए मांगने के लिए भेजा। छोटा राकेश तो अपनी माँ की बात मान चला गया।

रविवार का दिन था। राकेश जैसे ही अपने रिश्तेदार के घर पहुँचा, उसने देखा की सब बड़ी खुशी खुशी नास्ता कर रहे है। नास्तो में कई अलग अलग तरह के व्यंजन है, मानो कोई जलसा चल रहा है। राकेश ने एक बार अपनी स्थिति देखी की उसके घर में तो खाने को खाना तक नहीं है और सभी उदास मुँह लटकाये भूखे बैठे है।  

राकेश ने ख्यालों को छोड़ जो काम करने आया है उसकी पहल की, राकेश अपने रिश्तेदार के पास गया और बड़ी मासूमियत से बोला, “आंटी मम्मी ने पांच रुपए मांगे है, कल जब तन्खा आएगी वो आपको आ कर वापस कर जायेगी।”

रिश्तेदार धुआं पुआं हो गई और बोली, “कोई पैसे वैसे नहीं है हमारे पास, हमारे यहाँ पैसो का कोई पेड़ नहीं लगा है।” यह सुन कर राकेश की आँखों में आँशु आ गए और वह सीधा घर की तरफ दौड़ दिया।

रोता रोता राकेश सीधा घर पहुँचा। माँ बिना कुछ कहे ही समज गई थी के राकेश के साथ क्या हुआ, पर वह भी लाचार थी क्या करती आखिर। राकेश ने माँ से कहाँ, “अब में कभी किसी रिश्तेदार से मिलूँगा नहीं। जितना हो सके उतना हम सब काम करेंगे भगवान जरूर हमारी ओर देखेगा एक दिन।”

राकेश के शब्दो से अपमान और धिक्कार की भावना हलाहल विष की तरह छलक रही थी। उस छोटे बच्चे का कम उम्र में रिश्तों पर से विश्वास उठ गया था और उसे यह बात समज आ गई थी की अगर कुछ करना है तो मेहनत करनी होगी। भीख मांग कर राजा नहीं बना जा सकता।

पांच साल का राकेश बेचता था पेप्सी:

जिम कोच (Gym Coach) राकेश उदियर (Rakesh Udiyar) जब मात्र पांच साल का था तब से उसने पेप्सी बेचना शुरू कर दिया था और घर की जिम्मेदारी अपने छोटे छोटे कंधो पर उठाली थी। राकेश का भाई महेश भी किसी होटल में काम करने जाने लगा। पढ़ने लिखने की उम्र में दोनों बच्चे जिंदगी के सर्कस से जूझने लगे और उम्र से पहले ही बड़े हो गए।

राकेश की एक छोटी बहन भी थी। वह छोटी थी इसलिए वह घर पर रहती थी। राकेश की माँ पिता और छोटी बहन दोनों को संभालती थी और साथ ही साथ काम भी करती थी।

छोटा राकेश पेप्सी बेचता, एक पेप्सी का अगर पूरा पैकेट बिक जाए तब जा कर कही राकेश को डेढ़ रुपए मिलते थे। ज्यादा रुपए कमाने के लिए राकेश को दूर तक जाना पड़ता और फिर शुरू से शुरू करना पड़ता। राकेश बताते है की वह 10-15  किलोमीटर तक पेप्सी बेचने चले जाते थे।

राकेश की माँ ने अपने खातिर अपने बच्चों की पढ़ने की इच्छा को मरने नहीं दिया। उन्होंने राकेश और महेश दोनों को अलग अलग किसी घर में रख दिया जो उन्हें पढ़ा सके। राकेश ने बस एक ही इच्छा जाहिर की उसे पढ़ना है, बाकि वो किसी के घर में पुरे दिन नौकरो की तरह काम भी करने के लिए तैयार है।

राकेश और महेश दोनों को ऐसी जगाये मिल गई। महेश अँधेरी में, राकेश बांद्रा में और बहन माँ के पास रहती थी। ऐसे ही पढ़ने की चाह ने एक परिवार को अलग कर दिया और छोटी सी उम्र में सबने अलग रहना सीख लिया।    

अब छोटी सी उम्र का राकेश उदियर (Rakesh Udiyar) सुबह जल्दी उठता, पहले गाड़ी धोता फिर पुरे घर में सफाई करता। राकेश वो हर काम करता जो एक नौकर को करने चाहिए। वह 12 बजे तक सब साफ सफाई कर लेता और फिर सरकारी स्कुल के लिए निकल जाता। शाम को वापस आता और फिर वही काम करता था। मानों यही राकेश की दिनचर्या बन गई थी।

राकेश के पुरे परिवार ने की ज़हर खाने की कोशिश:

टॉप फिटनेस कोच (Top Fitness Coach) राकेश उदियर (Rakesh Udiyar) की जिंदगी का और एक ऐसा वाक्या है की घर में कुछ खाने को नहीं था। भूख से सब बेहाल हो रहे थे तब माँ आसपड़ोस में जाकर कही से थोड़े से चावल ले आयी थी। चावल इतने कम थे की उसे अच्छी तरह पकाया भी नहीं जा सकता था, पर सवाल भूखे बच्चों के पेट का था।

माँ ने कुछ तरकीब लगा कर उसे पेस्ट जैसा बना दिया, मानों चावल का पानी हो। अब जैसे ही महेश, राकेश और छोटी बहन सोनाली उसे खाने या कहो पीने गए तो माँ और बाप दोनों ही बड़ी जोर जोर से रोने लगे। बच्चे आश्चयर्य में पड़ गए की आखिर हुआ क्या! माँ ने एकाएक वो सारा चावल का पानी लिया और उठा कर बाहर फेक दिया।

राकेश और उनके भाई बहन उदास हो गए की आज भी उन्हें भूखा सोना पड़ेगा। फिर जब कुछ सालो बाद यह बात वापस निकली तब माँ ने बताया की, “तुम्हें पता है मैंने उस दिन वो खाना क्यों फेक दिया? क्योंकी उस खाने में मैंने चूहे मारने की दवा मिलाई थी!” और बस इतना ही कहते माँ रो पड़ी। 

अगर जो उस दिन राकेश और उसके परिवार ने ज़हर पी लिया होता तो आज हम ना ही उनके बारे में बात कर रहे होते और ना ही उन्हें हम जान पाते। राकेश कहते है की पता नहीं उस दिन वो कौन सी शक्ति थी जिसने उनकी जान बचा ली और माँ का निर्णय भी बदलवा दिया। वरना आज वह कामयाबी के सिखरो पर न होते।

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Top Gym Coach Rakesh Udiyar

राकेश को आया अंडरवर्ल्ड से ऑफर:

उस हादसे के बाद राकेश की माँ ने कहाँ की अब जो भी हो जाय हम काम करेंगे और अपनी मेहनत के बलबूते पर मुसीबतो को हरायेंगे। फिर वो लोग बांद्रा आ गए। राकेश ने भी बहुत से काम किए।

टॉप फिटनेस कोच (Top Fitness Coach)  राकेश उदियर (Rakesh Udiyar)  बताते है की एक बार उनके पास ऐसा ऑफर आया था की गैंगस्टर बन जाओ और अंडरवर्ल्ड ज्वाइन कर लो। यानि की गलत काम करने लगो पर राकेश ने कभी अपनी प्रमाणिकता नहीं खोई और हमेशा अपनी मेहनत के दम पर आगे बढ़ता चला गया।

जिम कोच (Gym Coach)  राकेश ने बांद्रा में डिलीवरी बॉय का काम किया, अख़बार बेचने का काम किया, घर घर जाकर दूध देने का काम किया और इसी तरह आगे बढ़ते चले गए। राकेश की जिंदगी में यही से एक अलग मोड़ आया। राकेश ने पावर लिफ्टिंग यानि की भारी वजन उठाने की प्रैक्टिस शुरू कर दी। उन्हें पहले से ही स्पोर्ट्स में बहुत रूचि थी।

कैसे शुरू हुआ राकेश की बॉडीबिल्डिंग का सफर?:

जिम कोच (Gym Coach)  राकेश उदियर (Rakesh Udiyar)  के एक दोस्त ने उनसे कहा की, “तुम्हारा शरीर भी अच्छा है, कैपिसिटी भी अच्छी है तो फिर परफेक्ट जिम करके,  अच्छी बॉडी बनाकर बॉडी बिल्डिंग में ट्राय क्यों नहीं करते?”

फिर शुरू हुआ राकेश की बॉडीबिल्डिंग का सफर। राकेश ने आगे चल कर मुंबई में प्रथम क्रम हांसिल किया फिर महाराष्ट्र में भी प्रथम आये, पर उन्हें कोई बड़ी प्रशंसा नहीं मिली। राकेश को घर पर भी मदद करनी थी, पैसे भी कमाने थे और अपने जिम के शौक को भी बरक़रार रखना था। 

उनके एक दोस्त एंथनी ने एक नौकरी बताई जो थी जिम में झाड़ू लगाने की। अपने जिम के प्रति लगाव के कारण वह झाड़ू लगाने की नौकरी के लिए भी मना नहीं कर पाए और उन्होंने काम शुरू कर दिया। पुरे दिन छोटी मोटी साफ सफाई करते और फिर जिमसे  सब चले जाते तब पूरा जिम साफ करते थे।

इस बीच फिटनेस कोच (Fitness Coach)  राकेश उदियर (Rakesh Udiyar)  को जिम की कुछ बातें यानि डाइट, नुट्रिसिन के बारे में  ट्रैनिंग और कसरतों के बारे में थोड़ी थोड़ी जानकारी हो गई थी। उन्हें यह पता चल गया था की एक बॉडीबिल्डर के लिए क्या क्या चीज़े जरुरी होती है। 

राकेश झाड़ू लगाते लगाते करते थे लड़के को ट्रेन:

इस बीच उनकी मुलाकात चिंटू नाम के एक लड़के से हुई जो वहाँ जिम करने के लिए आता था। ऐसे तो जिम दस बजे बंध हो जाता था पर राकेश उदियर (Rakesh Udiyar) को सफाई करते करते 11 बज जाते थे। चिंटू ने राकेश से रिक्वेस्ट की के वह उसे आधा घंटा जब तक राकेश सफाई कर रहा होता है उसे ट्रेनिंग करने दे।

उसके आगे चिंटू ने बताया की उसके पास सिर्फ 3 महीने ही है और फिर उसे किसी फ़ोटोसूट के लिए जाना है, जहाँ उसे मस्कुलर बॉडी की आवश्यकता होगी। राकेश उसकी बात पर तैयार हो गया। राकेश ने पहले दिन देखा की चिंटू मेहनत तो कर रहा है पर गलत तरीके से। 

राकेश उदियर (Rakesh Udiyar) ने जाकर चिंटू से कहा, “देखो में तो यहाँ झाड़ू लगता हूँ, पर यह जरूर जानता हूँ की तुम जो कर रहे हो वो बिलकुल गलत तरीका है। अगर आप कहो तो में आप को कुछ बताना चाहुँगा। अगर आप यह कर लोगे तो आपके लिए अच्छा होगा। चिंटू ने कहाँ, “ठीक है।”

फिर राकेश 10:30 तक अपना सारा काम ख़तम कर लेता था और फिर चिंटू को ट्रेनिंग करवाता था। ऐसे ही देखते देखते 3 महीने हो गए। चिंटू चला गया अपने फ़ोटोशूट के लिए और फोटोशूट बहुत ही अच्छा गया। चिंटू वापस आ कर राकेश से मिला उसका आभार माना।

दूसरे दिन जिम के मालिक का राकेश पर फ़ोन आया और कहा, “क्या तुमने इसे ट्रैन किया है?” राकेश ने बड़ा ही सीधा जवाब दिया की, “नहीं, मैंने तो बस मुझे जितना मालूम था वह उन्हें बताया है।” एक मिनट के लिए मालिक खुश भी हुए और राकेश पर गुस्सा भी हुए।

जिम के मालिक ने राकेश को एक सहायक की तरह जिम में रख लिया। अब राकेश जिम की सफाई का काम छोड़ एक सहायक की तरह जिम में आये लोगों की मदद करता और इसी दौरान उसे जिम और बॉडीबिल्डिंग का अच्छा ख़ासा नॉलेज भी हो गया था।

राकेश की जिंदगी का नया मोड़ दुबई:

राकेश उदियर (Rakesh Udiyar) जिम में अपनी जगह बना ही रहा था तभी उसे अपनी माँ का फ़ोन आया जो दुबई में थी। राकेश की माँ दुबई में एक सफाई कर्मचारी का कार्य करती थी। वहाँ पर तन्खा अच्छी थी तो राकेश की माँ ने उसे एक बार दुबई आकर प्रयास करने को कहा। 

राकेश सोच में पड़ गया। यहाँ जिम में उसकी अच्छी खासी जगह बन गई थी। उसे लोग जानने लगे थे और वह बहुत कुछ नया सिख भी रहा था। राकेश ने बहुत सोचा और आखिर में उसने माँ की बात मान कर दुबई जाने का निर्णय लिया, जो उनके लिए लाइफ चेंजिंग साबित हुआ। 

राकेश 3 महीने के ट्रेवल वीसा पर पहुँच गए दुबई। दुबई पहुँचने में पैसे जो उन्होंने जमा किये थे वै ख़तम हो गए थे। राकेश दुबई में रोज चल कर अलग अलग जिम जाते और अपनी CV दे कर आते की कही तो उनकी किस्मत जुडी होगी और उन्हें नौकरी मिल जायेगी।

एक महीने तक राकेश ने मानों कई जगह अपना हाथ आजमाया, पर कुछ हुआ नहीं। वह सुबह से शाम तक बस जिम के चकर लगाते की कही तो नौकरी मिल जाये। आखिर में उनकी मेहनत रंग लाई। एक जिम में उन्हें नौकरी मिल ही गई।

फिटनेस कोच ( Fitness Coach)  राकेश उदियर (Rakesh Udiyar) ने बड़ी ईमानदारी और मेहनत से काम करना शुरू कर दिया। उनके पास 3 महीने का ही वीसा था तो वह भारत वापस आये और फिर दुबई का वीसा लेकर वापिस गए। ऐसा कर उन्हों ने 3 साल दुबई में नौकरी की।

दुबई की नौकरी भी कुछ उन्हें ज्यादा रास नहीं आ रही थी। राकेश मेहनत करते पर उन्हें अपनी मेहनत और सूज बुज के हिसाब से कुछ ज्यादा बड़ी तक नहीं मिल रही थी।उन्होंने 3 साल के बाद आखिर दुबई छोड़ भारत आने का फैसला किया।

राकेश उदियर (Rakesh Udiyar) अपनी जन्मभूमि मुंबई वापस आये। अब उनके सामने परेशानी आ कर यह खड़ी हो गई की उन्हें सब शुरू से शुरू करना होगा। राकेश ने जीवन में हार मानना तो मानो सीखा ही नहीं था। कैसी भी मुसीबत हो वह उसका डट कर सामना करते थे और अपनी मेहनत के बलबूते पर उसे हरा ही देते थे।

राकेश ने मुंबई में पर्सनल फिटनेस ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया। लोगों ने खुब कहा की यह सब छोड़ और कोई सही काम धंधे में लग जा, पर राकेश को अपने और अपने काम पर पूरा भरोसा था। उसने लोगों की बातो को अनसुना कर दिया और पहले से भी ज्यादा मेहनत करने लगा।

राकेश को आया सलमान खान (Salman Khan) का फ़ोन:

फिटनेस कोच ( Fitness Coach)  राकेश उदियर (Rakesh Udiyar)  अपने काम में दिन-ब-दिन ओर ज्यादा बेहतर होते जा रहे थे। एक दिन उनका एक मित्र सिराज उनके पास आया और कहाँ, “एक ग्राहक है जिसे तुजे ट्रेन करना है।” राकेश ने तो हां कर दी। उनके दोस्त उन्हें ले गए उस ग्राहक के घर पे। राकेश तो बिलकुल अनजान थे की यह घर किसका है।

थोड़ी देर बाद उन्होंने देखा की बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता माने जाने वाले अरबाज़ खान सामने से चल कर आ रहे है। राकेश को जब पता चला की अरबाज़ ही वह शख्स से जिन्हें उन्हें ट्रेन करना है तब मानो उनके पैरो तले से जमीन खिसक गई।

जिम कोच (Gym Coach)  राकेश उदियर (Rakesh Udiyar)  ने अरबाज खान को ट्रेन किया, उसके बाद वह दबंग मूवी में दिखाई दिए। एक बार राकेश को एक अपरिचित मोबाइल से फोन आया और उन्होंने नहीं उठाया। फिर कुछ देर के बाद अरबाज खान (Arbaz Khan) का फोन आया और उन्होंने राकेश को कहाँ की जो अभी फोन आया था वह आपने क्यों नहीं उठाया?

वह फ़ोन किसी और का नहीं पर बॉलीवुड में भाई के नाम से मशहूर अभिनेता सलमान खान (Salman Khan) का था। राकेश ने तुरंत ही सलमान खान को फ़ोन किया और सलमान खान ने उन्हें अपना पर्सनल फिटनेस ट्रेनर (Personal Fitness Trainer) बनाने की मांग की। 

इसके बाद तो जानो जिम कोच (Gym Coach)  राकेश उदियर (Rakesh Udiyar) पुरे भारत में मशहूर हो गए। उन्होंने सलमान खान, आमिर खान, अरबाज खान और ओर भी कही बड़े बड़े अभिनेताओ को ट्रेन किया है। आज के वक्त में राकेश भारत के सबसे महंगे ट्रेनर है।

आज राकेश ख़ुशी ख़ुशी अपनी जिंदगी बिता रहे है। साल 2006 में उन्होंने रश्मि नाम की लड़की से शादी की और आज उनका एक रियान नाम का बेटा है।

तो दोस्तों, राकेश के जीवन की प्रेरणादायक कहानी (Motivational Life Story) से हमे सीखने को मिलता है की भले ही मुसीबते कितनी भी क्यों ना आये, अगर हमारे में आत्मविश्वास होगा और हम मेहनत करेंगे तो कामयाबी जरूर एक दिन हमारे कदम चूमेगी।

आपने यह पर्सनल फिटनेस ट्रेनर (Personal Fitness Trainer) राकेश उदियर की रियल लाइफ स्टोरी (Real Life Story) दिलचस्पी से पढ़ी इसका मतलब है की आपको ऐसी इंस्पिरेशनल रियल लाइफ स्टोरी (Inspirational Real Life Story) पढ़नी बहुत अच्छी लगती है। ऐसी ही हमारी ओर पुरानी वास्तविक प्रेरणादायक कहानी भी आपको पसंद आएगी, जैसे की बागेश्वर बाबा की रुला देने वाली जीवन कहानी और आईएएस सविता प्रधान की दिल दहला देने वाली प्रेरणादायक जीवन कहानी.

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Who is Rakesh Udiyar?

Rakesh Udiyar is famous Indian fitness coach or gym trainer.

Who is the fitness coach or gym trainer of Salman Khan?

Rakesh Udiyar is personal fitness coach or gym trainer of Salman Khan.

Who is the fitness coach or gym trainer of Amir Khan?

Rakesh Udiyar is personal fitness coach or gym trainer of Amir Khan.

Rakesh Udiyar is married ?

Yes, Rakesh Udiyar is married with Rashmi Udiyar.

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