झोपड़पट्टी से अमेरिका तक का सफर आँखों में आंसू ला देगा! Ruchi Jaiswal ki Prernadayak Kahani

Ruchi Jaiswal ki Prernadayak Kahani, आज मैं आपके समक्ष आंखे नम कर देने वाली एक महिला की ऐसी मोटिवेशनल रियल लाइफ स्टोरी पेश करने जा रहा हूं जिनको पूरे दिन में एक बार खाना भी नसीब में नहीं था। पढ़ाई करना मुश्किल था, पर संघर्ष करके पढ़ाई की। लोग उनको देखकर मुंह मोड़ लेते थे, वह लड़की ने जब अपने पापा को 32 लाख का फ्लैट गिफ्ट किया तब उनके पापा रो पड़े। ऐसी ही झोपड़पट्टी में रहने वाली जीरो से हीरो (Zero to Hero) बनी एक युवती जो संघर्ष करके अमेरिका पहुंची और करके दिखाया उसका नाम है रुचि जयसवाल। यह प्रेरणादायक रियल लाइफ स्टोरी (Motivational Real Life Story) पढ़कर शायद आपकी आंखें भी गीली हो सकती है।

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Ruchi Jaiswal Prernadayak Kahani

Table of Contents of Prernadayak Kahani:

रुचि जयसवाल ने संघर्ष करके पढ़ाई की:

चंडीगढ़ का बापूधाम स्लम विस्तार ऐसा इलाका था जहां गरीब लोग ही रहते थे। जब रुचि किसी को अपना एड्रेस बताती थी तब लोग मुंह बिगाड़ कर मुंह मोड़ लेते थे, जैसे उनके चेहरे पर चोर लिखा हो। कभी-कभी उनको खाना मिल जाता था तो कभी-कभी वह भी नसीब में नहीं होता था। ऊपर से रुचि को पापा का डर भी सता रहा था।

जब से उसने कॉलेज जाना शुरू किया था तब से उनके पापा ने खाना पीना बंद कर दिया था। जब रुचि को नौकरी मिली तब उनको जहर खाने की धमकी दी थी। पर उसने ठान लिया था कि उसने गरीबी में जरूर से जन्म लिया है, पर वह गरीब ही रह कर मरना नहीं चाहती थी। ऐसा जज्बा था रुचि जयसवाल में।

पहली सैलरी मिलने पर रुचि के पिता रोने लगे:

रुचि ने नौकरी ज्वाइन करने के बाद जब उसने जमा किए 40000 उनके पिताजी को दिए तब उनके पिताजी को पहली बार एहसास हुआ की लड़की भी काम कर सकती है। 32 लाख का फ्लैट लिया और जब पिता को रुचि ने चाबी दी तब उनके पिता भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू रोक नहीं पाए। आज उनके पास सब कुछ है। झोपड़पट्टी की फुटपाथ छोड़कर रुचि चंडीगढ़ के पास जीरकपुर में रहती है और अमेरिका जा कर आई है और अब ऑस्ट्रेलिया जाने वाली है।

आंखो में आंसू लाने वाली रूचि की मोटिवेशनल रियल लाइफ स्टोरी (Motivational Real Life Story) विगत से पढ़ते है.

ऐसी थी रुचि की संघर्ष भरी जिंदगी:

रुचि जयसवाल ने चार बहने और एक भाई के साथ चंडीगढ़ के बापूधाम जो एक झोपड़पट्टी का विस्तार है वहां पर जीवन की शुरुआत की। उसका बचपन वही स्लम एरिया में बिता। पापा छोटा बड़ा काम करते थे। कभी काम मिलता था तो कभी खाली हाथ घर वापस लौटना पड़ता था। कभी-कभी दिन में एक टाइम का खाना भी नसीब नहीं होता था। घर में जो होता था उस से पेट भर लेते थे।

ऐसी परिस्थिति में लोगों के ताने भी सुनने पड़ते थे। प्राइवेसी जैसी कोई चीज ही नहीं थी। जिस व्यक्ति का मन होता था वह घर पर आ जाते थे और जो बोलना है वह बोल कर चले जाते थे। ये अक्सर वो लोग होते थे जिनसे रुचि के पापा ने पैसे उधार लिए थे। यह तो रोज की कहानी थी, पर रुचि ने दिल से ठान लिया था की कुछ भी करके मुझे इस झोपड़पट्टी से बाहर निकलना है।

दोस्तो मुंह बिगाड़ते थे:

रुचि जब बढ़ी हुई और वह जब उनकी फ्रेंड के घर जाती थी तब या स्कूल में कोई फ्रेंड उससे एड्रेस पूछते थे तब रुचि बताती थी कि बापूधाम में वह रहती है। बापूधाम नाम सुनकर दोस्तों के बात करने का अंदाज और अभीगम बदल जाते थे। जैसे कोई गुनाह कर दिया हो ऐसा सभी के एटीट्यूड हो जाते थे। ऐसी घटनाएं याद करती थी तब रुचि की आंखों से आंसू उभर आते थे और उनके दिल में बड़ी चोट लगती थी। भगवान को मन ही मन कोसती थी।

नेशनल खेल में रुचि का हुआ सिलेक्शन:

2008 की साल में रुचि जैस्वाल की झोपड़पट्टी के पास की स्कूल में पढ़ाई करती थी और साथ में हैंडबॉल भी खेलती थी। अच्छा हैंडबॉल खेलने की वजह से रुचि की राष्ट्रीय टीम में सिलेक्शन हुआ। खेलने के लिए छत्तीसगढ़ जाना था। जब रुचि ने हैंडबॉल खेलने के लिए छत्तीसगढ़ जाने की बात पिताजी को कहीं तब उसने स्पष्ट मना कर दिया।

रुचि के पापा के ऊपर उनके रिश्तेदारों की इफेक्ट ज्यादा थी, क्योंकि रिश्तेदार उनको कहा करते थे की लड़की को घर से बाहर मत जाने दो। यह नेशनल खेल खेलना हमारे घर की लड़की का काम नहीं है। अगर हमारे घर की लड़की बाहर जाएगी तो इज्जत की धजिया उड़ जाएगी। रिश्तेदारों की ऐसी बातें रुचि के पापा के दिमाग में घुमा करती थी, इसी वजह से उसने बाहर खेलने जाने से मना कर दिया।

नेशनल खेल के लिए रुचि ने किया विद्रोह:

उनके पिताजी ने स्पष्ट मना कर दिया था, फिर भी रुचि ने ठान लिया था कि मुझे छत्तीसगढ़ जाना ही है। वह यह देखना चाहती थी कि बड़े घर की लड़कियां कैसे नेशनल खेल खेलती है। इनके पिताजी ने स्पष्ट बोल दिया था कि मैं एक भी पैसा नहीं दूंगा। देखता हूं कि तू किस तरह जाती है।

चेतावनी के बावजूद भी रुचि छत्तीसगढ़ जाने के लिए निकल पड़ी। इस नेशनल खेल में रहना और खाना मुक्त था, इसी वजह से उनको पैसों की खास कोई तकलीफ नहीं पड़ी। पिताजी की सम्मति नहीं थी फिर भी नेशनल खेल का अवसर गवाना नहीं चाहती थी। खेलने के लिए रुचि ने यह उनके पिताजी के सामने यह पहला विद्रोह किया, क्योंकि उसने तय कर लिया था कि कैसे भी, कुछ भी करके मुझे इस गरीबी के दलदल से बाहर निकलना ही है।

इसके अलावा भी बार-बार घर वालों के सामने खासतौर पर उनके पिताजी और रिश्तेदारों के सामने विद्रोह होता रहा। खासतौर पर जब बाहर जाना होता था तब घर में तहलका मच जाता था और वह उनके बुलंद इरादे पर अडग थी। रुचि कई बार नेशनल गेम खेलने गई। कहा जाता है कि कोई काम कितना ही कठोर क्यों ना हो, ज़िद और दृढ़ विश्वास है जरूर से पूरा किया जा सकता है।

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Ruchi Jaiswal Prernadayak Kahani

दसवीं के बाद पिताजी पढ़ाना नही चाहते थे:

2012 की साल में रुचि और उनकी बहन ने 10 वी कक्षा का अभ्यास पूर्ण किया था। घरवालों का मानना था कि लड़की ने दसवीं कक्षा पूर्ण कर ली है, इतना काफी है लड़की के लिए। इससे आगे पढ़ने की जरूरत नहीं है। दोनों बहनों ने पिताजी से कम से कम 12वीं कक्षा तक पढ़ने के लिए विनती की। बहुत रिक्वेस्ट करने के बाद आखिरकार पिताजी 12वीं तक पढ़ाई करने के लिए सहमत हुए। रुचि ने लोगों के ताने सहन किए और संघर्ष करके 12वीं कक्षा पूर्ण की।

रुचि के दिमाग में एक ही बात घूमा करती थी:

जब बारहवीं कक्षा पूर्ण कर ली रुचि के दिमाग में एक ही बात घूमा करती थी कि अब मुझे कुछ भी करके पैसे कमाना है। इस गरीबी से बाहर निकलना है और एक अच्छी जिंदगी जीना है। उनके दिमाग में एक ही ख्वाब आया करता था कि मुझे मेरी परिस्थिति में बदलाव लाना है और एक अच्छी जिंदगी जीना है। इसके लिए मुझे जो करना पड़ेगा वह मैं करूंगी और करके रहूंगी। वैसे भी कहा जाता है कि जो ख्वाब रात को नींद में आए वह नहीं, पर जो ख्वाब रात को सोने न दे वह ख्वाब सच होते हैं। रुचि को भी एक ही चाहत थी कि मुझे कुछ करके दिखाना है।

रुचि की इस बात से घर का माहोल हुआ तंग:

रुचि जयसवाल और उनकी बहन 12 वी कक्षा पास करके कॉलेज में अभ्यास करना चाहती थी। ऐसे में दूसरी ओर घर में खुशी की बड़ी बहन की शादी की बात चल रही थी। उस समय रुचि की कई सारी फ्रेंड्स की शादी भी हो चुकी थी। यह परिस्थिति पर खुशी को ऐसा महसूस हुआ जैसे दिमाग में कोई करंट दौड़ रहा हो! उनके दिमाग में यही ख्याल आया करता था की उनकी बहन की शादी हो जाएगी और उनकी शादी के बाद मेरी भी शादी हो जाएगी। वह सोच कर दुखी हो रही थी कि पता नहीं मुझे कैसा लड़का मिलेगा। पूरी जिंदगी ऐसे ही गरीबी में बितानी पड़ेगी। शादी होगी, उसके बाद बचे होंगे और घर की जवाबदारी।

उसने सोचा की अभी मैं कुछ नहीं कर पाऊंगी तो शादी के बाद कुछ होने वाला नहीं है। यूं ही मेरी जिंदगी बर्बाद होकर रहेगी। उसने हिम्मत इकट्ठी करके उनके पिताजी को कॉलेज जाने के लिए कहा। रुचि की कॉलेज जानेकी बात सुनकर उनके पिताजी को जटका लगा। जैसे रुचि ने कोई बड़ा अपराध कर दिया हो ऐसे उसने रुचि से कहा कि तुझे पता है कि तू यह क्या बोल रही है? उस वक्त रुचि ने हिम्मत से अपने पिताजी का सामना किया और कहा कि हां मैं अच्छे से जानती हूं कि मैंने आपसे क्या बात की है।

कॉलेज जाने पर पिताजी ने खाना पीना भी छोड़ दिया:

रुचि के परिवार में या तो उनके रिश्तेदार के परिवार में अब तक कोई भी लड़की कॉलेज गई नहीं थी। रुचि की इस जिद्द से उनके पिताजी ने खाना पीना भी छोड़ दिया। उनके पिताजी ने इमोशनल ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। पूरे घर का माहौल जहरीला बन चुका था। रुचि को बेचैनी का अहसास हो रहा था। उनको लग रहा था की शादी यानी जीवन की बर्बादी! शादी करना यानी जिंदगी का अंत! दिन रात रुचि के दिमाग में बस एक ही बात चल रही थी कि पापा को कैसे मनाऊं और पापा कैसे मानेंगे?!

रुचि ने कॉलेज फि के लिए ऐसा किया:

रुचि की कॉलेज जाने की जिद्द देखकर उनके पिताजी ने उनको कॉलेज नहीं जाने देने के लिए दूसरा तरीका अपनाया। उसने कहा कि अगर तू कॉलेज जाएगी तो मैं पैसा नहीं दूंगा, मैं कॉलेज की फि नहीं दूंगा। उस समय रुचि कुछ बोली नहीं। फिर उसने सोचा कि मैं पैसे कमा कर भी कॉलेज की फी भर सकती हूं। उनकी एक सहेली से रुचि ने बात की और जॉब के लिए कहा। उनकी सहेली एक कॉल सेंटर में काम करती थी। उनकी सहायता से रुचि को वहां नौकरी मिल गई और महीना 45000 पगार आना शुरू हो गया।

फिर उनके पिताजी ने जहर खाने की दी धमकी:

जब रुचि ने उनके पापा को कहा कि उनको नौकरी मिल गई है, तब घर में तहलका मच गया था। पूरे घर में तनाव का माहौल बन चुका था। उनके पिताजी ने कहा कि आज दिन तक हमारे घर में से कोई लड़की बाहर नौकरी करने नहीं गई है। अगर तू नौकरी करेगी तो मैं जहर खा लूंगा।

पिताजी की यह धमकी सुनकर रुचि मन ही मन बहुत डर गई थी। कई दिनों तक वह सोचती रही कि अब क्या करूं? फिर उसने सोचा की पापा ने धमकी दी है पर इतनी जल्दी कोई अपनी जान नहीं दे सकता। बाद में उसने हिम्मत इक्कठी की और अपने पिताजी को बोल दिया कि तुम्हें जो करना है वह करो मैं नौकरी करूंगी और कॉलेज भी जाऊंगी। उस समय उनकी मम्मी ने उनके पापा को समझाया और बाद में उनके पिताजी रुचि को कॉलेज जाने देने के लिए राजी हो गए।

पिताजी को काम मिलना बंद हुआ:

रुचि कॉलेज जाने लगी। कॉलेज जाने की वजह से समय नहीं मिलने के कारण उसने जॉब छोड़ दी। कालेज को एक साल कंप्लीट हुआ। उस दौरान उनके पिताजी रुचि से बात भी करते नहीं थे। जब वह कॉलेज के दूसरे वर्ष में थी तब उनके पिताजी को काम मिलना बंद हो गया। घर पर पैसे आना बंद हो गया। घर चलाने जितने पैसे भी उनके पिताजी कमा नहीं पा रहे थे। परिवार की स्थिति इतनी खराब हो गई कि एक किलो आटा लाकर दिन बिताने पड़ते थे। राशन खरीदने के लिए उनकी माताजी की अंगूठी भी बिक गई। रुचि ने उस दिन उनकी माताजी को रोते हुए देखा। उनकी माता का रोने वाला दृश्य उनके दिमाग में घर कर गया।

पिताजी को 40 हजार देने पर रुचि उनकी आंखे खुल गई:

कुछ दिन के बाद कॉलेज में छूटी पड़ने वाली थी। रुचि ने उनकी बड़ी दीदी से कहा की हम छुट्टी के दिन कुछ पार्ट टाइम काम कर सकते हैं। घर के पास एक नया मॉल खुला था। दोनों बहने वहां काम पर जाने लगी। तीन महीने में दोनों ने मिलकर 40000 रूपये कमाए। उसने जब पैसे पिताजी को दिए तब उनकी आंखे खुल गई कि मानना पड़ा की लड़कियां भी कुछ कर सकती है।

उस दिन उनके पिताजी को पहली बार एहसास हुआ कि मैं जिस लड़की को आगे जाने से रोकता रहा, बात बात में टोकता रहा, वही लड़की आज मुश्किल स्थिति में ढाल बनकर खड़ी है। उस दिन से उनके पिताजी रुचि से ठीक ढंग से बात करने लगे।

रुचि ने ज्वाइन किया NGO प्रोग्राम:

रुचि ने 2015 में अपना स्नातक पूर्ण किया। वह जहां रहती थी उस झोपड़पट्टी विस्तार में ही एक एनजीओ की ओर से चल रहे प्रोग्राम में रुचि ने एडमिशन लिया। उस प्रोग्राम में कम्युनिकेशन स्किल यानी बोलचाल की कला सिखाई जाती थी। इंटर कंट्री प्रोग्राम होते थे। दूसरे देश से भी बहुत सारे लोग आते थे। इस कम्युनिकेशन स्किल प्रोग्राम से उनको बहुत फायदा हुआ और अपनी अच्छी स्पीच की वजह से रुचि को मल्टीनेशनल खिलौने की दुकान पर अच्छी नौकरी मिल गई।

इससे रुचि को मिली प्रेरणा:

खिलौने की दुकान पर नौकरी करते समय रुचि ने पैसेदार लोग उनके बच्चों के लिए पंद्रह बीस हजार रूपये के खिलौने खरीदते देखा। वह देख कर रुचि मन ही मन परेशान होती थी। वह सोचती थी की कैसे बच्चें है, इतने महंगे खिलौने खरीद कर खेलते है। उनको इससे प्रेरणा मिलती थी और मन ही मन सोचती थी की मुझे भी ऐसा बनना है। मुझे भी महंगी चीजें खरीदनी है। मुझे भी ऐसा बनना है।

इस समय रुचि के लिए था बहुत कठिन:

सब कुछ सही चल रहा था ऐसे में उनके पिताजी को डेंगू हो गया। उस दिन रुचि को लगा की पिताजी को कुछ हो गया तो हम रास्ते पर आ जाएगा। समाज हमे बुरी नजर से देखने लगेंगे। उसने सोचा की कुछ भी करके पिताजी का इलाज करवा के उनको ठीक करना होगा। रुचि नौकरी से छूट कर हॉस्पिटल जाती थी। हॉस्पिटल पूरी रात पिताजी की सेवा करती थी। वहा से सीधी अपनी नौकरी पर जाती थी। वह अच्छे से सो भी नहीं पाती थी।

पिताजी को जब डेंगू हुआ उसके पंद्रह दिन बाद रुचि को भी डेंगू हो गया। अब सभी जिम्मेदारी उनकी माता पर आ गई। पंद्रह दिन के बाद दोनों ठीक हो गए थे। अभी भी रुचि उस समय को याद करना नहीं चाहती है। वह समय उनके लिए बहुत ही कठिन समय था।

ऐसे अमेरिका जाने की ऑफर मिली:

साल थी 2019 की। उस समय रुचि को पता चला कि अमेरिका में एक मल्टी ब्रांडेड स्टोर में रिटेल एसोसिएट्स के लिए एक इंटरव्यू रखा गया है। उसने किसीसे पैसे उधार लिए और तुरंत फ्लाइट से मुंबई पहुंची। उसका इंटरव्यू कुल छे राउंड में लिया गया था। इंटरव्यू में उसने अच्छा परफॉर्म किया और उसका सिलेक्शन अमेरिका के मल्टी ब्रांडेड स्टोर में हो गया।

वह समय उनके लिए बहुत खास था। उनके माता पिता को यकीन नहीं हुआ की ऐसे कैसे हो सकता है। शायद उस दिन उनके पेरेंट्स को अहसास हो गया था की वह गलत थे।

पेरिस एयरपोर्ट के वॉशरूम में जोर से लगी रोने:

रुचि अमेरिका जाने के लिए तैयार थी। वह फ्लाइट में रोमांचित हुई। रुचि की खुशी उनके चेहरे पर दिखाई दे रही थी। फ्लाइट ने थोड़े समय के लिए पेरिस में लैंड किया। वहा वॉश रूम में बैठ कर रुचि जोर जोर से रोने लगी। जब बाहर निकली तब किसीने रोने की वजह पूछी। रुचि ने कहा की उनको घर की याद आ रही थी। वह इंसान ने वहा से ऐसे चल दिया जैसे उसने कुछ सुना ही नहीं हो। इस घटना से रुचि को मालूम हुआ की ऐसी इमोशन को वहा कोई स्थान नहीं है। वहा लोगों को सिर्फ उनके काम से मतलब होता है।

जब 32 लाख के फ्लैट की चाबी पिताजी को दी तब…:

रुचि ने अपनी कमाई से बचत करना शुरू कर दिया। जब उसके पास अच्छी बैलेंस हुई तब उसने चंडीगढ़ में 32 लाख रुपए का फ्लैट लिया। रुचि वह फ्लैट उनके पिताजी के नाम पर लेना चाहती थी, पर दस्तावेज की वजह से ले न पाई। वह फ्लैट रुचि ने अपने नाम पर ही लिया और उसकी चाबी पिताजी को गिफ्ट दी। उस दिन रुचि अपने पिताजी का मुंह देख ना सकी, क्योंकि उनके पिताजी की आंखों से आंसू छलक रहे थे।

अब जा रही है ऑस्ट्रेलिया:

रुचि एक साल अमेरिका में रही और जॉब की। उनकी हेल्थ इश्यू की वजह से अमेरिका छोड़ कर भारत वापस आना पड़ा। बादमें वह फिर से 2021 में अमेरिका वापस गई। वर्तमान में रुचि अमेरिका को तिलांजलि दे कर भारत फिर से वापस आ गई है। थोड़े ही दिन में वह ऑस्ट्रेलिया जाने के लिए उड़ान भरेगी।

इंसान अगर कुछ करना चाहे तो सब कुछ कर सकता है, बस कुछ करने का जज्बा और चाहत होनी चाहिए. Khushi Jaiswal की prernadayak Kahani आपने पुरे इंटरेस्ट से पढ़ी उसके लिए धन्यवाद्. उम्मीद रखता हूँ की आपको यह motivational real life story पढ़ना पसंद आयी होगी. ऐसी ही प्रेरणादायक स्टोरी के लिए हमारे इस ब्लॉग को सब्सक्राइब कर लेना. आपको ऐसी ही ओर पुरानी motivational real life story पढ़ना पसंद आएगा. जैसे की Deepa Athreya ki motivational real life story और Google CEO Sundar Pichai sangharsh karke kaise bane Zero to Hero

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